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Showing posts from April, 2020

Human Trafficking

Human trafficking is a human tragedy. It's an outrage against any decent people. Mark Shields Human trafficking  is just another name for modern-day slavery, wherein the victims   involved are forced, coerced and deceived into labor and sexual exploitation. The 3 most common types of human trafficking are sex trafficking, forced labor, and debt bondage. Forced labor, also known as involuntary servitude, is the biggest sector of trafficking in the world, according to the U.S. Department of State. Debt bondage is another form of human trafficking in which an individual is forced to work in order to pay a debt. Sex trafficking disproportionately affects women and children and involves forced participation in commercial sex acts. In the United States, any child under the age of 18 who has been involved in a commercial sex act is considered a trafficking victim. Women and girls make up 80% of the people trafficked transnationally. Yearly, trafficke...

लॉकडाउन,परिवार और व्यवसाय

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सब  से सुना है ,बड़ों ने भी यही कहा है,परिवार से बढ़कर,धरती पर सुख कहाँ है? परिवार के साथ रहना हमेशा ही एक सुखद अनुभव होता है परंतु इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आजकल ऐसे कम ही पल मिल पाते हैं जब हमें परिवार के साथ रहने का मौक़ा मिले, यदि मैं स्वयं की बात करूँ तो पिछले 5 वर्षों में मैं इतना घर पे नहीं रहा जितना लॉकडाउन के दौरान रह चुका हूँ । इन कुछ दिनों में बहुत सी बातें सीखने को मिली और बहुत सी पुरानी यादें ताज़ा हो गई। परिवार के साथ पल बिताना एक नई ऊर्जा का संचार करता है एवं आपस में प्रेम की भावना को बढ़ाता है।इन दिनों हम सभी अपने परिवार के साथ रामायण, महाभारत देख रहे हैं ,साथ में भोजन कर रहे हैं, अलग अलग खेल खेल रहे हैं ,एक दूसरे का हाथ बढ़ा रहे हैं ये सभी चीज़ें हमें एक दूसरे को और अच्छी तरह से जानने में सहायता करेंगी।किसी ने सही कहा है  “घर में ही मिलती ऐसी सीख,जिसे नहींपढ़ाती कोई पाठशाला, मिलकर रहना,आगे बढ़ना,त्याग और प्रेम  की यहीं कर्मशाला”  इस लॉकडाउन ने न सिर्फ़ मेरे बल्कि हम सबके नजरिये में एक बदलाव लाया है जो कि बहुत ज़रूरी था। यदि सबसे महत...

ऑनलाइन शिक्षा और सामाजिक असमानता

पूरा विश्व कोरोनावायरस की चपेट में है ,प्रतिदिन हज़ारों लोग मर रहे हैं और हज़ारों लोग इस बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं, इस महामारी से कोई भी अछूता नहीं है चाहे वो किसी भी धर्म का हो किसी भी प्रांत का हो।  इस महामारी ने पूरे विश्व को बहुत प्रभावित किया है  चाहे वो  आर्थिक छोर पर हो या सामाजिक छोर पर हो शिक्षा पर भी इसका ख़ासा प्रभाव पड़ा है.  विश्व के बड़े बड़े अर्थशास्त्री बड़ी बड़ी हस्तियां आर्थिक सामाजिक छोर पर लिख चुके है . शैक्षणिक छोर पर भी कई प्रोफ़ेसर लिख चुके हैं जैसे कि जिंदल यूनिवर्सिटी के श्रीराम चोलिया | ये बात सही है कि हर विपदा अपने साथ संभावनाएं भी लगती है जैसे की परंपरागत शिक्षा से ऑनलाइन शिक्षा की ओर बढ़ना,शिक्षा पद्धति में बदलाव एवं योग्यता नापने के नए नए पैमाने इत्यादि क्योंकि अभी पूरा देश लॉकडाउन में है मानव संसाधन मंत्रालय कॉलेजों वह स्कूलों में ऑनलाइन ऑन लाइन शिक्षा को बढ़ावा देने पर जो डाल रहा है पर इससे पहले हमें ये देखना होगा कि कितने लोगों के पास स्मार्टफ़ोन है और कितने लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा है। उदाहरण के तौर पर मेरी ग...